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बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण, 2026:विकास दर के मामले में दूसरे स्थान पर,4 लाख करोड़ से अधिक कर्ज , वेतन, पेंशन,सूद खर्च में बढ़ोत्तरी
बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण, 2026:विकास दर के मामले में दूसरे स्थान पर,4 लाख करोड़ से अधिक कर्ज , वेतन, पेंशन,सूद खर्च में बढ़ोत्तरी
वेतन पर 28386 करोड़, पेंशन पर24292 करोड़ और
by
Arun Pandey,
February 02, 2026
in
बिहार
देश में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाले राज्यों में, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 76 हजार रुपये हुई: वित्त मंत्री
पटना,02 फरवरी बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण, 2026 की रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में पेश हुई। इसमें विकास दर के मामले में विहार दूसरे स्थान पर,4 लाख करोड़ से अधिक कर्ज , वेतन, पेंशन,सूद खर्च में बढ़ोत्तरी हो रही है। वेतन ओर पेंशन खर्च में 22.7% वृद्दि के साथ 2024-25 में 64645 करोड रुपए खर्च होंगे। सूद की अदायगी पर 23014 करोड़ और कर्ज लौटाने पर 20539 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य देश में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य बनकर उभरा है और राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि बड़े राज्यों की तुलना में बिहार विकास दर के मामले में दूसरे स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु पहले स्थान पर है।
वित्त मंत्री ने कहा बिहार का आर्थिक विकास दर 13.1 फीसदी, राष्ट्रीय वृद्धि दर 7.3 फीसदी है।
विधानमंडल में बिहार आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह 69 हजार रुपये से बढ़कर 76 हजार रुपये हो गई है। सरकार का मुख्य फोकस औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर है।
यादव ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने के उद्देश्य से पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति को छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक नीति के तहत सरकार ने शुरुआती दस वर्षों में बिजली और सड़क अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया। अब सरकार का जोर औद्योगिकीकरण और रोजगार पर है, ताकि राज्य के लोगों की आमदनी में तेज़ी से वृद्धि हो सके।
इस मौके पर वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
वित्त मंत्री ने बताया कि कि वर्ष 2024–25 के लिए नवीनतम त्वरित अनुमान के अनुसार, बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) स्थिर मूल्यों (2011–12) पर 8.6 प्रतिशत तथा वर्तमान मूल्यों पर 13.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इस दौरान जीएसडीपी का आकार स्थिर मूल्यों पर 5.31 लाख करोड़ रुपये और वर्तमान मूल्यों पर 9.92 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर से अधिक रहने का अनुमान है।
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2024–25 में द्वितीयक क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जहां इसकी वृद्धि दर स्थिर मूल्यों पर 11.1 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 15.5 प्रतिशत रही। वहीं तृतीयक क्षेत्र में स्थिर मूल्यों पर 8.9 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्राथमिक क्षेत्र में भी स्थिर मूल्यों पर 4.1 प्रतिशत तथा वर्तमान मूल्यों पर 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020–21 से 2024–25 के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। इस अवधि में द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत से बढ़कर 26.8 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों का विस्तार है। वहीं प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत से घटकर 18.3 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 57.0 प्रतिशत से घटकर 54.8 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि यह बदलाव राज्य की अर्थव्यवस्था में बढ़ते विविधीकरण को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति जीएसडीपी 2020–21 में 46,412 रुपये से बढ़कर 2024–25 में 76,490 रुपये हो गया है, जबकि स्थिर मूल्यों पर यह 30,159 रुपये से बढ़कर 40,973 रुपये हो गया है। यह राज्य के नागरिकों की आय में सुधार का स्पष्ट संकेत है।
राजकोषीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2020–21 में राज्य सरकार का कुल व्यय 1.66 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024–25 में बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान पूंजीगत व्यय का अनुपात 15.8 प्रतिशत से बढ़कर 22.3 प्रतिशत हो गया, जबकि राजस्व व्यय का अनुपात घटा है। राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति 1.28 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.18 लाख करोड़ रुपये हो गई है और कर राजस्व की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो गई है।
कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (जीवीए ) में योगदान 23.1 प्रतिशत रहा है। धान, गेहूं और मक्का के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ दुग्ध, अंडा और मछली उत्पादन में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के घर तक बीज पहुँचाने की व्यवस्था लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 राज्य की अर्थव्यवस्था की सकारात्मक और भविष्य उन्मुख तस्वीर प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक स्थिरता, क्षेत्रीय विविधीकरण, बढ़ता निवेश, मानव पूंजी का विकास, रोजगार सृजन और सतत अवसंरचना विकास बिहार की प्रगति के मजबूत आधार हैं।
बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा है कि बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूती, निरंतर विकास और भविष्य की संभावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण बिहार की आर्थिक प्रगति का एक संतुलित और यथार्थपरक आकलन प्रस्तुत करता है।
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2024–25 में द्वितीयक क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जहां इसकी वृद्धि दर स्थिर मूल्यों पर 11.1 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 15.5 प्रतिशत रही। वहीं तृतीयक क्षेत्र में स्थिर मूल्यों पर 8.9 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्राथमिक क्षेत्र में भी स्थिर मूल्यों पर 4.1 प्रतिशत तथा वर्तमान मूल्यों पर 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020–21 से 2024–25 के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। इस अवधि में द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत से बढ़कर 26.8 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों का विस्तार है। वहीं प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत से घटकर 18.3 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 57.0 प्रतिशत से घटकर 54.8 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि यह बदलाव राज्य की अर्थव्यवस्था में बढ़ते विविधीकरण को दर्शाता है।
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