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विशेष राज्य की सियासत, बिहार में बना चुनावी एजेंडा
विशेष राज्य की सियासत, बिहार में बना चुनावी एजेंडा
कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर केन्द्र के पाले में डाला
by
Arun Pandey,
November 22, 2023
in
राजनीति
अरुण कुमार पाण्डेय
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने की पुनः मांग की
अब विशेष राज्य की सियासत के साथ बिहार में यह चुनावी एजेंडा बन गया है।सीएम नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक में विशेष राज्य के मुद्दे को केन्द्र सरकार के पाले में डाल दिया है।22 नवम्बर को उन्होने ट्वीट कर इसकी जानकरी दी है। उन्होंने कहा-
"
देश में पहली बार
बिहार में जाति आधारित गणना कराने के बाद सर्वाधिक 75%आरक्षण लागू किया
है। जाति आधारित गणना के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जाति के लिये आरक्षण सीमा को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षण की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण की सीमा को 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण की सीमा को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है अर्थात सामाजिक रूप से कमजोर तबकों के लिये आरक्षण सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण पूर्ववत लागू रहेगा। अर्थात इन सभी वर्गो के लिए कुल आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
94 लाख गरीब परिवार और 65 हजार आवासहीन परिवार को मिलेगी आर्थिक मदद
जाति आधारित गणना में सभी वर्गों को मिलाकर बिहार में लगभग 94 लाख गरीब परिवार पाये गये हैं, उन सभी परिवार के एक सदस्य को रोजगार हेतु 2 लाख रूपये तक की राशि किश्तों में उपलब्ध करायी जायेगी।
63,850 आवासहीन एवं भूमिहीन परिवारों को जमीन क्रय के लिए दी जा रही 60 हजार रूपये की राशि की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रूपये कर दिया गया है। साथ ही इन परिवारों को मकान बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रूपये दिये जायेंगे।
जो 39 लाख परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं उन्हें भी पक्का मकान मुहैया कराया जायेगा जिसके लिए प्रति परिवार 1 लाख 20 हजार रूपये की दर से राशि उपलब्ध करायी जायेगी।
सतत् जीविकोपार्जन योजना के अन्तर्गत अत्यंत निर्धन परिवारों की सहायता के लिए अब 01 लाख रूपये के बदले 02 लाख रूपये दिये जायेंगे।
इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लगभग 2 लाख 50 हजार करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी।
इन कामों के लिये काफी बड़ी राशि की आवश्यकता होने के कारण इन्हें 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाय तो हम इस काम को बहुत कम समय में ही पूरा कर लेंगे। हमलोग बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की माँग वर्ष 2010 से ही कर रहे हैं। इसके लिए 24 नवम्बर, 2012 को पटना के गाँधी मैदान में तथा 17 मार्च, 2013 को दिल्ली के रामलीला मैदान में बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के लिए अधिकार रैली भी की थी। हमारी माँग पर तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके लिए रघुराम राजन कमेटी भी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट सितम्बर, 2013 में प्रकाशित हुई थी परन्तु उस समय भी तत्कालीन केन्द्र सरकार ने इसके बारे में कुछ नहीं किया। मई, 2017 में भी हमलोगों ने विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा था। आज कैबिनेट की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने हेतु केन्द्र सरकार से अनुरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। मेरा अनुरोध है कि बिहार के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुये केन्द्र सरकार बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे।"[
22/11, 7:54 pm] Arun Kumar Pandey: बिहार की सियासत में अब विशेष राज्य का दर्जा की मांग फिर अप्रैल-मई में अवश्य॔भावी चुनाव का प्रमुख एजेंडा बनना तय हो गया है। कैबिनेट की बैठक में "अन्यान्य " प्रस्ताव के रूप में इसे स्वीकृत किया गया है। इसके पहले सीएम नीतीश कुमार इसके लिए आंदोलन शुरू करने की भी घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि बिहार को आगे बढ़ाना है तो इसके लिए विशेष दर्जा पाना होगा। इसके लिए राज्य के हर कोने में आवाज उठाई जायेगी। विशेष राज्य का दर्जा मिल जाए तो दो साल में बिहार का विकास हो जाएगा।
[बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों से भी इस मांग से संबंधित विशेष प्रस्ताव पारित कर भी केन्द्र सरकार को काफी पहले भेजा गया था। केन्द्र सरकार या बिहार में भाजपा के साथ सत्ता में रहते नीतीश कुमार विशेष राज्य बनाने की मांग नहीं पूरी करा सके।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने विशेष राज्य का दर्जी के बदले आरा की जनसभा में जब बिहार के लिए 1.25 लाख लाख करोड रुपए का विशेष पैकेज की घोषणा की थी तब नीतीश कुमार ने तंज और व्यंग करते हुए कहा था इसमें कुछ भी विशेष नहीं है
यह पुरानी निर्माणाधीन और पहले से स्वीकृत योजनाओं को विशेष पैकेज के रूप में परोस कर बिके साथ छल हुआ है। यह केंद्र सरकार के विवेक और तय मानदडों के आधार पर राजनीतिक निर्णय होता है। मानदंड के हिसाब से पहाड़ी क्षेत्र हो,दुर्गम क्षेत्र हो,कम जनसंख्या,आदिवासी इलाका,अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा,प्रति व्यक्ति आय कम और कम राजस्व आय वाला राज्य हो तो उसे विशेष राज्य का दर्जा मिलता है। 1969 में सबसे पहले असम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने के बाद अरुणाचल, हिमाचल, सिक्किम, मिजोरम और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिला है।
बिहार से नेपाल से आनेवाली नदियों प्रत्येक वर्ष जानमाल की बर्बादी-तबाही,गरीबी,पिछड़ेपन और अधिक आबादी के मद्देनजर विशेष राज्य की मांग होती रही है। नवंबर, 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने से वन और खनिज संपदा सहित बोकारो स्टील संयंत्र, एचईसी,टाटा उद्योग ,पतरातू थर्मल ,बीआईटी,मेसरा,सहित कई अन्य प्रमुख संस्थानों के मुख्यालयों से भी बिहार को हाथ धोना पड़ा था।
ऐसे भी विशेष राज्य का दर्जा संवैधानिक अधिकार में नहीं आता।
अब लाख टके का सवाल बन गया है कि सीएम नीतीश कुमार के विशेष राज्य के चुनावी दांव पर पीएम नरेन्द्र मोदी कौन सा कदम उठायें?
अभी विशेष राज्य का दर्जा के लिए केन्द्र सरकार के मानक पर बिहार नहीं आता। बिहार की ही मांग पर केन्द्र सरकार ने रघुरामराजन कमिटी बनाई थी। उसने किसी भी राजा को विशेष राज्य का दर्जा देने के औचित्य को हो खारिज कर दिया था।इस कमिटी में बिहार से लालू-नीतीश के पसंदीदा अर्थशास्त्री शैवाल गुप्ता भी सदस्य थे। सितम्बर, 2013 में इसकी रिपोर्ट भी आई पर बिहार की बात नहीं बनी।
सीएम नीतीश कुमार ने खुद स्वीकारा भी उनकी यह मांग पुरानी है। पर यह बिहार के हक और हित में होने के कारण जब तक पूरी नहीं होगी,इसको लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के लिए केन्द्र से विशेष सहायता और अनुदान के साथ विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का सम्पूर्ण खर्च की भरपाई केन्द्र सरकार करती है। ऐसे राज्य में उद्योग लगाने पर केन्द्र से आयकर , उत्पाद कर कार्पोरेट टैक्स आदि में छूट सहित कई रियायतें मिलती हैं
फिलहाल बिहार को विशेष राज्य का दर्जा की नहीं पूरी होने वाली मांग कै पीछे सियासत भी है और यह चुनावी एजेंडा भी है। भाजपा को 40 लोकसभा सीट वाले बिहार में 2014 और 2019 की जीत 2024 में भी हासिल करने की राह में कई चुनौतियां हैं। 2014 में बिहार में नीतीश के सत्ता में रहते विरोध के बावजूद भाजपा को अच्छी जीत मिली थी। 2019 में नीतीश साथ रहे तब लालू प्रसाद के राजद का खाता नहीं खुला था। 40 लोकसभा सीटों में सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस को कामयाबी मिली शेष सभी सीटें राजग की झोली में गयी थी।
इस बार के चुनाव में नीतीश-लालू के साथ रहकर कांग्रेस और वामदल को भी चुनावी वैतरणी पार लगने की उम्मीद बंधी है। विशेष राज्य का दर्जा के साथ पूरे देश में जातीय गणना कराने और आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की मांग के पीछे पीएम नरेन्द्र मोदी को बिहार के राजनीतिक जंग में चुनौती देने की तैयारी भी देखी जा सकती है।
उधर सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि
विशेष राज्य पर कैबिनेट का प्रस्ताव मरे घोड़े पर चाबुक चलाने जैसा
है।
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पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब 14 वें वित्त आयोग ने "विशेष राज्य" की अवधारणा को ही अमान्य कर दिया है और अब किसी भी राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता, तब इस मुद्दे पर बिहार सरकार का कैबिनेट से पारित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है। इस मरे हुए घोड़े पर नीतीश कुमार कितना भी चाबुक चलायें, घोड़ा दौड़ने वाला नहीं।
श्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार को विशेष आर्थिक पैकेज देकर विशेष दर्जा से कई गुना अधिक मदद कर रहे हैं, लेकिन राजद-जदयू यह स्वीकार नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद केंद्र सरकार में ताकतवर मंत्री रहे, तब इन लोगों ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिलवाया ?
श्री मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस बताये कि 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह की सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं दे दिया?
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की पहल पर यूपीए सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जो रघुरामराजन कमेटी गठित करायी थी, उसने भी "विशेष राज्य" की मांग को खारिज कर दिया था।
श्री मोदी ने कहा कि जब नीतीश कुमार केंद्र के विरोधी खेमे में रहते हैं, तब चुनाव निकट देख कर केंद्र को बदनाम करने के लिए विशेष दर्जे की मांग पर राजनीति शुरू कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ से अधिक राशि खर्च कर बिहार में जो आधा दर्जन से ज्यादा मेगा ब्रिज और 4-लेन,6- लेन सड़कों का नेटवर्क तैयार हो रहा है, वह विशेष दर्जा मिलने से कम नहीं है। यहाँ जो भी बड़ा ढांचागत विकास हुआ, वह विशेष आर्थिक पैकेज और केंद्र की सहायता से संभव हुआ। इससे बिहार के हजारों परिवारों को रोजगार मिला।
श्री मोदी ने कहा कि विशेष दर्जा के बिना विशेष केंद्रीय पैकेज से राज्य के 2.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में बिहार को उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा 1.02 लाख करोड़ की राशि मिलती है।
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